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फीस न भर पाने पर छात्रा ने दी जान! आत्महत्या के बाद हरकत में आया शिक्षा विभाग, स्कूल बंद मिलने पर प्रबंधन से मांगा लिखित जवाब

अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में फीस न भर पाने के कारण कथित प्रताड़ना से परेशान 17 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित निजी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। जिला शिक्षा विभाग की टीम लगातार दो दिनों तक स्कूल पहुंची, लेकिन स्कूल बंद मिला और प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि अधिकारियों से मिलने नहीं आया।

फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित डीडीआई स्कूल की छात्रा अमजोत कौर की मौत के बाद पंजाब सरकार और शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) राजेश कुमार और डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी राजेश खन्ना के नेतृत्व में विभागीय टीम सोमवार और मंगलवार को स्कूल परिसर पहुंची। हालांकि दोनों दिनों में स्कूल के मुख्य गेट और कक्षाओं पर ताले लटके मिले।

स्कूल प्रबंधन से मांगा गया जवाब

जिला शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर छात्रा की आत्महत्या से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर लिखित जवाब मांगा है। अधिकारियों के अनुसार अभी तक स्कूल की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्कूल प्रशासन का जांच में सहयोग न करना भी गंभीर विषय है और इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी मामले को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि छात्रा की मौत के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार ने शिक्षा विभाग को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

फीस को लेकर कथित प्रताड़ना का आरोप

जानकारी के अनुसार, अमजोत कौर 11वीं कक्षा की छात्रा थी। परिवार का आरोप है कि स्कूल में फीस और दाखिले से संबंधित लगभग 20 हजार रुपये बकाया थे। इसी बकाया राशि को लेकर स्कूल प्रशासन द्वारा छात्रा को कथित रूप से प्रताड़ित किया गया।

मृतका की मां सरबजीत कौर का कहना है कि 22 मई को उनकी बेटी को स्कूल में प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ सदस्यों के सामने अपमानित किया गया था। इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी।

परिजनों का आरोप है कि इसी मानसिक दबाव और अपमान से आहत होकर छात्रा ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था।

अस्पताल में चली जिंदगी की जंग

जहरीला पदार्थ खाने के बाद छात्रा को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिनों तक उसका इलाज चला। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद शनिवार देर रात उसकी मौत हो गई।

छात्रा की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। परिवार ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

जांच के दायरे में स्कूल प्रशासन

मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस सभी स्तरों पर जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वास्तव में छात्रा को फीस के कारण सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया था और क्या उसकी आत्महत्या के पीछे स्कूल प्रशासन की भूमिका रही है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर निजी स्कूलों में फीस को लेकर अपनाए जाने वाले रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि किसी भी छात्र को आर्थिक कारणों से मानसिक प्रताड़ना का सामना नहीं करना चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और शिक्षा विभाग स्कूल प्रबंधन के जवाब का इंतजार कर रहा है। छात्रा की मौत ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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