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देश में फर्जी वकीलों पर कसेगा शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस, हर 3 में से 1 वकील फर्जी होने का दावा.

नई दिल्ली : देश की न्याय व्यवस्था और वकालत जैसे पवित्र पेशे से जुड़े एक बेहद चौंकाने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। फर्जी और फर्जी डिग्री के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे वकीलों के खिलाफ देशव्यापी सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में यह गंभीर दावा किया गया है कि देश में कुल वकीलों का एक बड़ा हिस्सा फर्जी है, जिससे न्याय प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और याचिका के मुख्य बिंदु

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया, जिसे अदालत ने अत्यंत गंभीर करार दिया है।

  • याचिकाकर्ता के आरोप: वकील राजा चौधरी द्वारा दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि वकालत के पेशे का भारी दुरुपयोग हो रहा है और जो लोग असली वकील नहीं हैं, वे इस पद की आड़ में अवैध वसूली जैसे कृत्यों में संलिप्त हैं।
  • फर्जी वकीलों का आंकड़ा: याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के प्रमुख मनन मिश्रा के उस पूर्व बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के विभिन्न बार एसोसिएशनों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत वकील फर्जी हैं यानी हर तीन में से एक वकील बिना वैध प्रमाण या फर्जी दस्तावेजों के प्रैक्टिस कर रहा है।
  • इलाहाबाद का मामला: सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि अकेले इलाहाबाद बार में ही 1,000 से अधिक फर्जी वकील सक्रिय हैं। चीफ जस्टिस ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल ही में 105 वकीलों से जुड़ा मामला भी सामने आया है।

उत्तर प्रदेश में तेज हुई कार्रवाई और FIR का शिकंजा

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ‘कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश’ मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गई थी कि इस पेशे में माफिया किस्म के लोग घुस आए हैं, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। इस सख्त निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश में फर्जी वकीलों पर प्रशासन की गाज गिरनी शुरू हो गई है।

  • बार काउंसिल की सिफारिश पर अब तक इलाहाबाद में दर्जनों वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
  • राज्य पुलिस के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में करीब 100 और एफआईआर दर्ज की जानी हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से अमلی जामा पहनाया जा रहा है ताकि न्यायिक कामकाज में कोई बाधा न आए।

देश में वकीलों की संख्या और वेरिफिकेशन के नियम

कानून मंत्रालय द्वारा अगस्त 2023 में राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में उस समय कुल 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट थे, और हर साल लगभग 80,000 नए वकील इस पेशे से जुड़ रहे हैं।

वकालत करने के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से लॉ (Law) की डिग्री और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। वकीलों की प्रमाणिकता की जांच के लिए ‘सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन रूल्स-2015’ का पालन किया जाता है, जिसके तहत हर 5 साल पर वकीलों को अपनी प्रैक्टिस से जुड़ी सही जानकारी बार काउंसिल को देनी होती है। सही जानकारी न मिलने या फर्जी पाए जाने पर कड़े एक्शन का प्रावधान है। 

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