“मांगें लिखित रूप में मानने तक जारी रहेगा अनशन” – देवेंद्र नाथ महतो के आंदोलन पर सोनम वांगचुक का स्पष्टीकरण

रांची। जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में मोरहाबादी स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन लगातार जारी है। इसी बीच आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर प्रख्यात शिक्षाविद् और इनोवेटर सोनम वांगचुक के स्पष्टीकरण के बाद विराम लग गया है।
दरअसल, आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को लेकर यह खबर फैलाई जा रही थी कि उन्होंने भूख हड़ताल खत्म कर दी है। सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए केवल पानी और नमक ग्रहण करने का आग्रह किया था, जिसे महतो ने स्वीकार कर लिया।
बताया गया कि देवेंद्र नाथ महतो का अन्न त्याग अब भी जारी है। वह पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, जबकि छात्रों का आंदोलन 13वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक अनशन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक ने युवाओं से की अपील
सोनम वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि देवेंद्र नाथ महतो का अनशन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आंदोलन को कमजोर करने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर पानी लेने की बनी सहमति
देवेंद्र नाथ महतो ने पहले अन्न और जल दोनों का त्याग कर दिया था, जिसके कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। डॉक्टरों ने भी स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। स्थिति गंभीर होने पर सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए उनसे बातचीत की और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी और नमक लेने के लिए मनाया।
CJP का प्रतिनिधिमंडल पहुंचेगा रांची
छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े अभिजीत दीपके भी जल्द रांची पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह झारखंड के छात्रों और युवाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। वहीं, सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रंका ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।
राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने का ऐलान
छात्र संगठनों ने साफ किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहेगा। किसी भी राजनीतिक दल या नेता को मंच का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और रोजगार के अधिकारों को लेकर है।
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