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Shimla- छात्रवृत्ति घोटाला : CBI ने पहली चार्जशीट तैयार कर मंजूरी के लिए हैडक्वार्टर भेजी

cbi prepared first chargesheet and sent headquarters for approval

शिमला: 250 करोड़ रुपए से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने पहली चार्जशीट तैयार कर ली है। आरोपों के घेरे में आए जिला ऊना से जुड़े संस्थानोंके खिलाफ यह चार्जशीट तैयार की गई है। इसके साथ ही जांच ब्यूरो ने आगामी प्रक्रिया अमल में लाते हुए संबंधित चार्जशीट को अदालत में पेश करने से पहले मंजूरी के लिए दिल्ली मुख्यालय को भेजा है, ऐसे में मुख्यालय से स्वीकृति मिलते ही छात्रवृत्ति घोटाले में पहली चार्जशीट अदालत में दायर कर दी जाएगी।

छात्रवृत्ति घोटाले में हो चुकी हैं 3 गिरफ्तारियां

सीबीआई की शुरूआती जांच से ही राडार पर रहे पंडोगा और नवांशहर स्थित संस्थानों के अंतर्गत भारी अनियमितताएं उभर कर सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों संस्थानों में 360 के आसपास छात्रवृत्तियांजांच के घेरे में हैं। करोड़ों के गोलमाल में जांच एजैंसी ने कई चेहरों को चार्जशीट में नामजद किया है। छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीज्यूशन के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी, उच्च शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक ग्रेड-2 अरविंद राजटा और सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के हैड कैशियर एसपी सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

आबंटित सीटों से अधिक संख्या में दी गईं छात्रवृत्तियां

छानबीन में पाया गया है कि निजी शिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ मुलाजिमों ने आपसी मिलीभगत से सूबे में घोटाले का अंजाम दिया। कई संस्थानों के खिलाफ जांच ब्यूरो छानबीन कर रहा है। सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी, जिसके बाद छानबीन में पूरे घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। आरोप ये भी लगे हैं कि विभिन्न पाठ्यक्रमों के तहत आबंटित सीटों से अधिक संख्या में छात्रवृत्तियां दी गईं। इसके साथ ही कुछ स्थानों में प्रार्थना पत्रों की संख्या से अधिक संख्या में छात्रवृत्तियों का वितरण हुआ। आधार नंबर व मोबाइल नंबर के साथ ही छात्रों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करोड़ों रु पए की छात्रवृत्तियां हड़पने के आरोप कई संस्थानों पर लगे हैं।

जैसे चाही वैसे डकार ली स्कॉलरशिप

छात्रवृत्ति हड़पने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए। जिस तरह मन चाहा, वैसे ही छात्रवृत्ति हड़प ली गई। जिसके नाम पर मिली, उसे पता तक नहीं लगा। सूत्रों के अनुसार जांच में पाया गया है कि छात्रवृत्ति हड़पने के लिए छात्रों की जाति को ही बदल दिया गया। छात्रवृत्ति की रकम ज्यादा हड़पने के लिए यह खेल खेला गया। इसके साथ ही छात्रों के विषय (संकाय) तक बदल दिए गए। संस्थान छोड़ चुके छात्रों को संस्थान का फर्जी छात्र दिखाकर और उनके विषय बदलकर छात्रवृत्तियां हड़पी गईं।

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