‘सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया’, संसद में स्मृति ईरानी पर सपा प्रमुख बोले- ‘सास बहू वाली तो हार गईं…’.

नई दिल्ली। आज शाम को देश की संसद में महिला आरक्षण पर अहम वोटिंग होनी है, लेकिन उससे पहले गुरुवार को संसद में इस मुद्दे को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। इस बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर अपने तीखे विचार प्रकट किए, साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद स्मृति ईरानी का भी जिक्र किया।
अखिलेश यादव ने कहा- सास बहू वाली तो हार गईं आपकी
अखिलेश यादव ने सांसदों के बीच अपने भाषण में कहा कि यदि भाजपा सीटें रिजर्व कर देगी तो महिलाओं के बीच ही प्रतियोगिता करवा रहे हैं। उन्होंने पार्टी आधार पर महिला आरक्षण का प्रावधान करने की भी मांग उठाई। साथ ही, उन्होंने स्मृति ईरानी पर तंज कसते हुए कहा, “सास बहू वाली तो हार गईं आपकी। पार्टी को तो मौका मिलेगा।”
यह टिप्पणी होते ही सदन में हंसी का माहौल बन गया। अखिलेश यादव का यह बयान विपक्ष और सरकार दोनों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
स्मृति ईरानी ने कहा- सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया
अखिलेश यादव की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया। अच्छा है, जिनको राजनीति धरोहर में मिली, वे उनको भी याद करते हैं जो अपने दम पर आसमान में सुराख करते हैं।”
स्मृति ने आगे कहा, “कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी करने वाले वे नेता हैं जिन्होंने कभी नौकरी नहीं की। अब उन्हें संसद में ध्यान देना चाहिए और महिलाओं के अधिकारों के लिए जरूरी बिल पास कराना चाहिए।”
पीएम मोदी की जाति को लेकर बयान और सियासी नोकझोंक
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में पीएम मोदी को लेकर भी कुछ ऐसा कहा, जिसने सियासी हलचल मचा दी। उन्होंने पूछा कि जब प्रधानमंत्री को पिछड़े वर्ग के वोट चाहिए थे, तब उन्होंने खुद को पिछड़ी जाति से बताया था। अब जब जाति आधारित जनगणना का सवाल उठता है, तो सरकार पीछे हटती नजर आ रही है।
इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ बयान भ्रम और चिंता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जाति के आधार पर भी जनगणना कराने का फैसला कर चुकी है, और वर्तमान में जो काम चल रहा है, वह घरों की गिनती का है, जिसमें जाति का कोई उल्लेख नहीं है।
अमित शाह ने यह भी तंज कसा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वे अपने स्तर पर सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इस बयान के बाद सदन में तीखी नोकझोंक और बढ़ गई।
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