‘सुअर का दूध पीते हैं क्या?’, गौहत्या पर सीएम योगी ने कहा- ‘जो गाय खाते हैं, वो…’

गौहत्या पर सीएम योगी का तीखा बयान- ‘जो गाय खाते हैं, क्या वे सूअर का दूध पीते हैं?’
- गोरखपुर में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में दिया बयान, बंगाल चुनाव के बाद यूपी में भी गरमाया ‘गौमाता’ का मुद्दा
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौहत्या और गौमाता को लेकर दिया गया बयान इन दिनों राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। गोरखपुर में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन के दौरान उन्होंने सवालिया लहजे में कहा- “जो लोग गाय का मांस खाते हैं, क्या वे सूअर का दूध पीते हैं?” उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया का कोई भी व्यक्ति गाय को माने या न माने, लेकिन दूध गाय का ही पीता है। उन्होंने इसे प्रकृति और ईश्वर का दिया हुआ वरदान बताया। उन्होंने कहा कि जैसे एक बच्चा अपनी मां का दूध पीता है, उसी तरह गाय का दूध भी मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है और भारतीय परंपरा में इसे मातृशक्ति के रूप में सम्मान दिया गया है।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में भारत की प्राचीन परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि यहां मातृशक्ति को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान राम को कौशल्यानंदन, भगवान कृष्ण को यशोदानंदन, भीष्म पितामह को गांगेय और अर्जुन को कौंतेय कहकर संबोधित किया जाता है, जो माताओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि काशी में “नमः पार्वती पतये” और मथुरा-वृंदावन में “राधे-राधे” का उच्चारण इसी परंपरा की झलक है।
गौमाता का मुद्दा क्यों गरमाया?
हाल के दिनों में गौहत्या और गौमाता का मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा में रहा है। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच विवाद के बाद यह मुद्दा और तूल पकड़ गया। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों- समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
शंकराचार्य द्वारा गोहत्या के विरोध में यात्रा निकालने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया। इसी बीच बंगाल चुनाव में भी यह विषय प्रमुखता से उभरा, जहां सीएम योगी ने “गौमाता को कटने नहीं देंगे, हिंदुओं को बंटने नहीं देंगे” का नारा दिया था।
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी ने दावा किया कि वहां की महिलाओं ने बदलाव का मन बना लिया है। उन्होंने हावड़ा के पास एक रैली का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा उम्मीदवार को मंच लगाने से रोका गया, लेकिन भारी संख्या में महिलाएं 45 डिग्री तापमान में भी समर्थन के लिए पहुंचीं।
अब इसी मुद्दे को उत्तर प्रदेश में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गौमाता और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सीएम योगी के बयान के बाद जहां समर्थक इसे सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इस पर आलोचना भी कर सकते हैं। फिलहाल, यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज और तेज होने की संभावना है।
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