HP News: इस बार युवाओं के सहारे सियासी नैया लगेगी किनारे, भाजपा-कांग्रेस ने बदले समीकरण, नए चेहरों पर दांव

प्रदेश के चार नगर निगमों के चुनावों में इस बार प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने परंपरागत चेहरे बदलकर युवाओं और नए उम्मीदवारों पर बड़ा दांव खेला है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अधिकांश वार्डों में टिकट वितरण के दौरान पुराने चेहरों को किनारे कर नए और युवा चेहरों को आगे लाने की रणनीति अपनाई है।
लिहाजा दोनों प्रमुख राजनीतिक दल जनता के रुख को देखते हुए नए और युवा चेहरों के सहारे सत्ता का रास्ता बनाने की फिराक में है। प्रदेश के चार नगर निगमों धर्मशाला, मंडी, पालमपुर और सोलन की कुल 64 सीटों पर चुनाव हो रहा है। जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। वहीं, अब नामांकन पत्रों की स्क्रूटनिंग समेत अन्य प्रक्रियाएं होगी। जिसके बाद 17 भी के चारों नगर निगमों में मतदान होना है।
चुनाव परिणाम 31 मई को आएगा। उधर, चारों नगर निगम चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर लंबी कसरत के बाद मुहर लगाई है। इसके तहत दोनों दलों ने नगर निगम चुनावों में अधिकतर नए युवा और युवा चेहरों को तरजीह दी है। हालांकि दोनों दलों के इस निर्णय के चलते पुराने चेहरे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में कूद चुके हैं।
माना जा रहा है कि शहरी मतदाता अब स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ नेतृत्व की कार्यशैली और सक्रियता को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दलों ने टिकट वितरण में युवा, शिक्षित और सामाजिक रूप से सक्रिय चेहरों को तरजीह दी है। कई वार्डों में पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
टिकट कटने से नाराज पुराने नेता बगावत की राह पर
हालांकि नई रणनीति का दूसरा पहलू भी सामने आया है। टिकट कटने से नाराज पुराने नेता और कार्यकर्ता अब बगावती तेवर में नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को अपने ही दल के असंतुष्ट नेताओं से चुनौती मिल रही है। इससे चुनावी समीकरण जटिल हो गए हैं और मुकाबले त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनते दिख रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। एक ओर उन्हें नए चेहरों के माध्यम से जनता का विश्वास जीतना है, वहीं दूसरी ओर आंतरिक असंतोष को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। कई वार्डों में बागी उम्मीदवारों का प्रभाव इतना है कि वे परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।
हालांकि अभी तक बागियों को मनाने के लिए दोनों दलों की ओर से पूरे प्रयास भी आरंभ कर दिए हैं, जिससे अब नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर साफ हो पाएगी, लेकिन अभी तक जो हालात चारों नगर निगमों में बने हैं, उससे दोनों दलों की राह आसान नजर नहीं आ रही है। बहरहाल चारों नगर निगमों के चुनाव इस बार केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि पीढ़ी परिवर्तन की भी परीक्षा बन गए हैं।
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