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सोने के निवेशकों के लिए बहुत बुरी खबर! ₹1.10 लाख से भी नीचे आ सकते हैं दाम, बैंक ऑफ अमेरिका का बड़ा दावा

सोने के निवेशकों के लिए बहुत बुरी खबर! ₹1.10 लाख से भी नीचे आ सकते हैं दाम, बैंक ऑफ अमेरिका का बड़ा दावा


सोने की चमक फीकी पड़ने की आशंका

सोने के बाजार में लगातार दूसरे हफ्ते आई गिरावट के बीच बैंक ऑफ अमेरिका (BofA Gold Price Outlook) की एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसे देखकर निवेशकों के होश उड़ सकते हैं।


बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल सकती हैं।

बैंक का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव गिरकर करीब 3,750 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है। अगर इसे भारतीय मुद्रा (Indian Currency) के हिसाब से समझें, तो यह स्तर लगभग ₹1.15 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठ सकता है। हालांकि, भारत में सोने की असली कीमतें डॉलर-रुपए के एक्सचेंज रेट और घरेलू बाजार के हालात पर पूरी तरह से निर्भर करेंगी।

क्यों बदला बैंक ऑफ अमेरिका का मूड?

आपको बता दें कि बैंक ऑफ अमेरिका पिछले दो सालों से सोने की कीमतों को लेकर सबसे ज्यादा बुलिश (तेजी का अनुमान लगाने वाले) संस्थानों में गिना जाता रहा है। यही नहीं, सबसे पहले 5,000 डॉलर प्रति औंस का टारगेट देने वालों में भी यह बैंक आगे था। लेकिन अब हालात बदलते देख बैंक का रुख काफी सतर्क हो गया है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ती एनर्जी कीमतें और उससे महंगाई के मोर्चे पर पैदा होने वाला दबाव है।

क्या वाकई 1.10 लाख से नीचे आ जाएगा सोना?

बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा के बढ़ते दाम सोने के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। खासकर मिडल ईस्ट और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर पूरी दुनिया के बाजार की नजरें टिकी हुई हैं। बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूते हुए 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो साल 2027 में सोने की औसत कीमत गिरकर लगभग 3,500 डॉलर प्रति औंस यानी भारतीय करंसी में करीब 1.08 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक रह सकती है। हालांकि, बैंक ने इसे अपना मुख्य अनुमान नहीं माना है।

जनवरी में दिया था 5000 डॉलर का बड़ा टारगेट

रिपोर्ट के अनुसार, इस समय सोने की कीमतों को सिर्फ निवेशकों की मजबूत मांग का ही सहारा मिल रहा है। इसी साल जनवरी में बैंक ने कहा था कि सोने को 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर पर टिकाए रखने के लिए निवेश की मांग में लगभग 14% की जोरदार बढ़ोतरी होनी चाहिए। लेकिन अब बैंक का साफ कहना है कि मौजूदा निवेश मांग केवल 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास के भाव को ही संभाल सकती है। जानकारों के मुताबिक, 5,000 डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) के आंकड़े तक पहुंचने के लिए निवेशकों की मांग में बेतहाशा तेजी की जरूरत है, जो मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

सोने के सामने मंडरा रहा है सबसे बड़ा जोखिम

सोने के निवेशकों के लिए एक और बहुत बड़ा खतरा सेंट्रल बैंकों (Central Banks) द्वारा की जाने वाली बिकवाली बन सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से उन देशों की मुद्राओं और करेंट अकाउंट पर भारी दबाव आ जाएगा जो तेल का आयात करते हैं। ऐसी गंभीर स्थिति में कई देश अपनी अर्थव्यवस्था और खुद की करेंसी को बचाने के लिए अपने पास रखे सोने का भंडार बेच सकते हैं।

बैंक ने खुलासा किया कि दूसरी तिमाही के दौरान तुर्की की अगुवाई में दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने मिलकर लगभग 60 टन सोना बेच डाला था। इतना ही नहीं, मार्च के महीने में भी केंद्रीय बैंक नेट सेलर की भूमिका में नजर आए थे। BofA का मानना है कि अगर यह पुराना ट्रेंड एक बार फिर जोर पकड़ता है और साथ ही रिटेल निवेशक गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से अपना पैसा बाहर निकालना शुरू कर देते हैं, तो सोने के दामों पर और ज्यादा दबाव बढ़ जाएगा।

जानिए कहां पर ट्रेड कर रहा है सोना और चांदी?

अगर मौजूदा बाजार भाव की बात करें, तो ग्लोबल मार्केट में इस समय सोना 4,217 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार (gold rate today) कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, चांदी भी 61 डॉलर के पार ट्रेड (silver price today) करती नजर आ रही है। अगर बात भारतीय वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की करें, तो वहां गोल्ड का भाव 1,50,250 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,25,545 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।

खास बात यह है कि यह लगातार दूसरा ऐसा हफ्ता है जब सोना और चांदी दोनों ही महंगे होने के बजाय सस्ते हुए हैं। बीते हफ्ते के दौरान अकेले सोने की कीमत में लगभग 3,200 रुपए और चांदी के भाव में 9,100 रुपए तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

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